जादुई चिड़िया और भूखा शिकारी
“बहुत समय पहले की बात एक घने जंगल के किनारे एक छोटी-सी झोपड़ी में एक गरीब शिकारी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। वह जंगल में शिकार करके अपने परिवार का पेट पालता था। कभी शिकार मिलता, तो खाना बनता, और कभी-कभी पूरा परिवार भूखा ही सो जाता था। एक दिन सुबह वह धनुष और तीर लेकर शिकार करने निकला। वो सुबह से शाम तक जंगल में भटकता रहा, लेकिन कोई जानवर नहीं मिला। भूख और थकान से उसका बुरा हाल हो गया। आखिरकार वो एक बड़े पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगा। तभी उसे मधुर आवाज़ सुनाई दी, “चूँ-चूँ, चूँ-चूँ।” ऊपर देखा तो एक पेड़ की डाल पर लाल पंखों वाली सुंदर चिड़िया बैठी थी। चिड़िया ने इंसानों की तरह बोलते हुए कहा, “हे शिकारी, तुम बहुत थके हुए और भूखे लग रहे हो, क्या तुम्हारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है?” शिकारी ने उदास होकर जवाब दिया, “हाँ, आज सुबह से शिकार की तलाश में भटक रहा हूँ, लेकिन कुछ भी नहीं मिला। घर पर मेरी पत्नी और बच्चे भी भूखे होंगे, नहीं समझ पा रहा आज उनका पेट कैसे भरूँगा।” यह सुनकर चिड़िया को उस पर दया आ गई। उसने कहा, “तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारी मदद करूँगी।” “ये लो मेरा एक लाल पंख। इसे अपने घर ले जाओ, यह तुम्हारे परिवार के लिए भोजन का इंतज़ाम कर देगा।” शिकारी हैरान रह गया। उसने चिड़िया का शुक्रिया किया और पंख लेकर घर लौट गया। घर पहुँचकर उसने अपनी पत्नी को सारी बात बताई। दोनों ने उस पंख को एक छोटी सी कड़ाही में डालकर पकाना शुरू किया। कुछ ही देर में कड़ाही से स्वादिष्ट खुशबू आने लगी। जब उन्होंने कड़ाही खोली, तो अंदर स्वादिष्ट खाना तैयार था। उन्होंने अपने बच्चों को बुलाया, और सबने पेट भर खाना खाया। बहुत दिनों बाद पूरे परिवार ने इतना अच्छा खाना खाया था। शिकारी मन ही मन जादुई चिड़िया को धन्यवाद देने लगा। अगले दिन वह फिर जंगल गया और उसी पेड़ के पास पहुँचा। चिड़िया ने उसे देखकर खुशी से अपना एक और पंख दे दिया। अब यह रोज का नियम बन गया। शिकारी जंगल जाता, चिड़िया से मिलता और एक पंख लेकर घर लौट आता। उसके परिवार को हर दिन भरपेट भोजन मिलने लगा। लेकिन जहाँ शिकारी उस चिड़िया का शुक्रगुज़ार था, वहीं उसकी पत्नी के मन में धीरे-धीरे लालच बढ़ने लगा। एक दिन उसने सोचा, “अगर एक पंख से इतना खाना मिलता है, तो सारे पंख मिल जाएँ तो ज़िंदगीभर की चिंता खत्म।” उसने अपने पति से कहा, “तुम हर दिन एक ही पंख क्यों लाते हो? उस चिड़िया के सारे पंख एक साथ क्यों नहीं ले लेते?” शिकारी ने समझाया, “वो चिड़िया हमारी मदद कर रही है। हमें उसका एहसान मानना चाहिए, लालच नहीं करना चाहिए। अगर हमने उसके साथ बुरा किया, तो अपनी खुशियाँ खो देंगे।” लेकिन उसकी पत्नी पर लालच छा चुका था। उसने अपने पति की नहीं सुनी। एक दिन, जब शिकारी घर पर नहीं था, उसकी पत्नी चुपके से जंगल चली गई। वह उसी पेड़ के पास पहुँची, जहाँ लाल पंखों वाली चिड़िया बैठी थी। चिड़िया ने पूछा, “तुम कौन हो?” क्या तुम शिकारी की पत्नी हो? तुम्हारा पति तो रोज़ मुझसे मिलने आता है।” शिकारी की पत्नी ने मीठी आवाज़ में कहा, “हाँ, मैं उसी की पत्नी हूँ। मैं तुम्हें देखने आई हूँ।” चिड़िया उसकी बातों पर विश्वास कर गई। तभी मौका देखकर शिकारी की पत्नी ने उसे पकड़ लिया। चिड़िया बहुत छटपटाई, लेकिन लालची महिला ने उसकी एक न सुनी। उसने चिड़िया को मार डाला। उसके बाद उसने चिड़िया के सारे लाल पंख इकट्ठे किए और खुशी-खुशी घर लौट आई। वह मन ही मन सोच रही थी, “अब हमारे पास इतने पंख हैं कि हमें जीवन भर खाने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।” लेकिन… जब उसने सारे पंख एक बड़ी कड़ाही में डालकर पकाना शुरू किया, बहुत देर बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। ना कोई जादू, ना खाना। कड़ाही में बस साधारण पानी और पंख पड़े रहे। उसकी खुशी चिंता में बदल गई। जब शिकारी घर लौटा और सारी बात पता चली, तो वह बहुत दुखी हुआ। उसने अपनी पत्नी से कहा, “तुमने यह क्या कर दिया? वो चिड़िया बिना किसी स्वार्थ के हमारी मदद कर रही थी, लेकिन तुमने लालच में आकर उसकी जान ले ली। अब न चिड़िया रही और न उसका जादू!” पत्नी को अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन अब पछताने से क्या फ़ायदा? चिड़िया वापस नहीं आ सकती थी। उस दिन घर में खाना नहीं बना। शिकारी, उसकी पत्नी और बच्चे फिर से भूखे सो गए। शिकारी अक्सर उस पेड़ के नीचे बैठकर चिड़िया को याद करता और सोचता, काश उसने अपनी पत्नी को लालच करने से रोका होता। लेकिन समय बीत चुका था। अब उसके पास केवल पछतावा बचा था। इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि लालच हमेशा दुख का कारण बनता है। हमें जो मिलता है, उसके लिए आभारी होना चाहिए। याद रखिए, संतोष सबसे बड़ा धन है अगर आपको यह कहानी पसंद आई ह तो इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें. धन्यवाद
