एक समय की बात है। एक बूढ़ी औरत रोज़ बाजार में ताज़ी-ताज़ी मिठाइयाँ बेचने आती थी। मिठाइयाँ बेचने के बाद वह एक रहस्यमयी पहाड़ की ओर चली जाती थी।
एक दिन एक जिज्ञासु लड़के ने सोचा, “आखिर यह बुढ़िया मिठाइयाँ बेचने के बाद कहाँ जाती है?” यह जानने के लिए वह चुपचाप उसके पीछे-पीछे पहाड़ पर चला गया।
पहाड़ पर एक छोटी-सी झोपड़ी थी। झोपड़ी के बाहर एक बड़ी-सी कड़ाही रखी हुई थी। बुढ़िया ने कड़ाही की ओर देखकर कहा, “जादुई कड़ाही, ताज़ी मिठाइयाँ बनाओ!”
इतना कहकर वह झोपड़ी के अंदर चली गई। देखते ही देखते कड़ाही में ढेर सारी गरमा-गरम मिठाइयाँ बन गईं।
मिठाइयों की मीठी खुशबू से लड़के के मुँह में पानी आ गया। वह मिठाई खाने के लिए कड़ाही के पास पहुँचा ही था कि अचानक बुढ़िया झोपड़ी से बाहर आ गई।
बुढ़िया को सामने देखकर लड़का घबरा गया। वह बिना मिठाई खाए वहाँ से भागा और सीधे अपने घर पहुँचा। उसने अपने माता-पिता को पहाड़ पर देखी सारी बातें सच-सच बता दीं।
अगले दिन लड़का अपने माता-पिता के साथ पहाड़ पर गया। लेकिन वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि झोपड़ी के आसपास कोई नहीं था। केवल पहाड़ के ऊपर से धुआँ निकल रहा था।
उस दिन के बाद बुढ़िया फिर कभी बाजार में मिठाई बेचने नहीं आई।
आज भी जब उस पहाड़ के आसपास घने बादल दिखाई देते हैं, तो गाँव के लोग कहते हैं, “देखो! जादुई कड़ाही से आज भी धुआँ निकल रहा है!”
और इस तरह उस पहाड़ की जादुई कड़ाही की कहानी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाने लगी।