नन्हा दीपक और अंधेरी रात..

एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक प्यारा और जिज्ञासु बच्चा रहता था। उसे नई-नई चीजें सीखना और दूसरों की मदद करना बहुत पसंद था।एक दिन गाँव में अचानक तेज आँधी आई। आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते पूरे गाँव की बिजली चली गई।चारों तरफ घना अँधेरा हो गया।आरव की माँ ने कहा,“बेटा, आज रात घर से बाहर मत निकलना। बहुत अँधेरा है।”आरव खिड़की से बाहर देखने लगा। तभी उसे पड़ोस के घर से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी।वह बोला,“माँ, लगता है मोहन डर गया है।”माँ ने एक छोटा-सा दीपक जलाकर आरव के हाथ में दे दिया।“इसे लेकर जाओ, लेकिन सावधानी से।”आरव दीपक लेकर मोहन के घर पहुँचा। मोहन अँधेरे से बहुत डर रहा था।आरव ने मुस्कुराकर कहा,“डरो मत मोहन, देखो हमारे पास रोशनी है।”मोहन ने दीपक की ओर देखा और उसका डर थोड़ा कम हो गया।तभी रास्ते में उन्हें गाँव की एक बुजुर्ग दादी दिखाई दीं। उनका घर भी अँधेरे में था और वे रास्ता नहीं देख पा रही थीं।आरव ने अपना दीपक आगे कर दिया।“दादी, आप मेरे साथ चलिए।”दोनों बच्चे दादी को उनके घर तक छोड़ आए।दादी ने खुश होकर कहा,“बेटा, तुम्हारा दीपक तो बहुत छोटा है, लेकिन इसने आज कई लोगों का डर दूर कर दिया।”आरव मुस्कुराया और बोला,“दादी, रोशनी छोटी हो या बड़ी, अगर किसी के काम आ जाए तो वही सबसे बड़ी बात है।”अगली सुबह गाँव में बिजली वापस आ गई। गाँव के लोगों ने पिछली रात की बात सुनी तो सभी ने आरव की खूब प्रशंसा की।उस दिन आरव को समझ आया कि किसी समस्या के सामने यह सोचना जरूरी नहीं कि हमारे पास कितना है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि हम उससे क्या अच्छा कर सकते हैं।

सीख:छोटी-सी मदद भी किसी के जीवन में बड़ी रोशनी ला सकती है।